क्यों पंछी हुआ उदास ,अपना नीड़ छोड़ कर ,
जिसे संजोया था ,तिनका -तिनका जोड़ कर।
न किया गिला किसी से ,न शिकायत किसी की ,
चुप-चाप उड़ चला वो ,अपनी पीड़ ओढ़कर।
मुड़ के देखा तो था , पड़ा बिखरा हुआ अतीत ,
पर जा रहा था वो,कुछ सच्चे रिश्ते तोड़ कर।
खट्टी-मीठी यादे चल रहीं थी ,चलचित्र की तरह ,
दिल करता था देखता रहे, चित्रों को जोड़ कर।
टीस सी उठ रही है दिल में , उस दर को छोड़ते ,
है! इल्तिजा वक्त से ,ले आये वो ''वक्त'' मोड़ कर।
'कमलेश'कहते हैं ये सब ,किश्मत का रचा खेल है ,
कभी कौन ? शौक से गया है ,अपना ''नीड़ ''छोड़ कर।।
जिसे संजोया था ,तिनका -तिनका जोड़ कर।
न किया गिला किसी से ,न शिकायत किसी की ,
चुप-चाप उड़ चला वो ,अपनी पीड़ ओढ़कर।
मुड़ के देखा तो था , पड़ा बिखरा हुआ अतीत ,
पर जा रहा था वो,कुछ सच्चे रिश्ते तोड़ कर।
खट्टी-मीठी यादे चल रहीं थी ,चलचित्र की तरह ,
दिल करता था देखता रहे, चित्रों को जोड़ कर।
टीस सी उठ रही है दिल में , उस दर को छोड़ते ,
है! इल्तिजा वक्त से ,ले आये वो ''वक्त'' मोड़ कर।
'कमलेश'कहते हैं ये सब ,किश्मत का रचा खेल है ,
कभी कौन ? शौक से गया है ,अपना ''नीड़ ''छोड़ कर।।

