गुरुवार, 7 जून 2018 | By: kamlesh chander verma

संविधान ...खतरे में।।

हर तरफ से बस एक ही शोर है।
संविधान है खतरे में वन्समोर है।

अराजकता की धुंध दिख रही है कहीं!
या सिर्फ़ हंगामा कुछ और है।

सेंकने को अपनी राजनीतिक रोटियां,
या जनता के दर्द का शोर है।

है अगर बेचैनी तो खोल लो आँखे
अपने ही हैं, नहीं कोई और है।

ज्यादा दिन नहीं ढोते बोझ आजकल,
क्योंकि नई सदी में बदलाव का दौर है।

अगर धुंआ है तो ज़रूर कहीं आग होगी,
पता करने की नीयत शायद कमज़ोर है।

कमलेश'पहचानों धरातल की हक़ीक़त को,
कल होगी धरा यही ,पर तल कोई और है।।

शनिवार, 12 मई 2018 | By: kamlesh chander verma

ना विषय बदलेंगे....।।

ना विषय बदलेंगे  ,ना सरोकार बदलेंगे।
यही जो चूमते हैं दर,यही 'सरकार' बदलेंगें ।।

वही कुर्सियां होगी , होंगी वही ज़िल्लतें सारी/
नीति वही होगी पर देखना ,कैसे ये नीयत का  आधार बदलेंगे।।

प्रचंड बहुमत का नशा जब ,छाएगा इनके जेहन में।
यही
देखना कैसे चुपके से ,सभ्य व्यवहार बदलेंगे।।

समन्दर में दूर जब इनकी,सत्ता की नाव पंहुचेगी ।
बैठे है जो इसमें विश्वासपात्र ,यही पतवार बदलेंगे।।

बदलना इतिहास का इतना भी ,आसां  नही है लेकिन।
'कमलेश,देखना है ये,
कैसे इस सहरा की बहार बदलेंगे।।

#Kamlesh Verma

शुक्रवार, 4 मई 2018 | By: kamlesh chander verma

जब तक तेरी इन आँखों...।।

जब तक तेरी इन आँखों को, इंतजार रहेगा।
तब तक मेरी इन आँखों में ,प्यार रहेगा।।

अपलक खुली रहेंगी ये, उम्र भर के लिए,
जब तक साँसों का ज़िस्म पर, अख्तियार रहेगा।।

क्यूँ कर कोई चाहेगा ये, बन्द हो आंखे,
जब तक तेरी चाहत का, छाया ख़ुमार रहेगा।।

ये तो मुरीद हैं तेरे, दीदार की खातिर,
इनका ये इसरार हमेशा ,हर बार रहेगा।।

कोई और बस जाए ,इन आँखों में आ के,
इससे इंकार इक बार नहीं ,सौ बार रहेगा।।

कमलेश'अलग ही मज़ा है ,इस ज़ुनून का,
बस इक ही नशा होता है ,प्यार प्यार का।।
@कमलेश वर्मा, कमलेश,



शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018 | By: kamlesh chander verma

मिलता हूँ रोज़ खुद.....

मिलता हूँ रोज खुद से,पर मुलाकात नही होती।
मिलती हैं नजरों से नजर ,पर बात नही होती ।

बन कर अज़नबी जी रहे हैं ,दोनों बरसों से।
पर चाह कर भी हममे ,कोई बात नही होती।

कभी तो लगता है अनजाने ,हो गये है ये आसमाँ-जमीं,
इन्सान हो गया  खुद अपने से ,कितना अज़नबी।

'कमलेश' आज हम सब से  मिलेंगे ,ये तो बस ख्याल है।
जब हम खुद से मिलेंगे वो जरूर ,चांदनी रात होगी।।

#Kamlesh Verma