बुधवार, 19 दिसंबर 2018 | By: kamlesh chander verma

जो बैठ न्याय की....।।।

जो बैठ न्याय की कुर्सी पर ,
मुंसिफ इंसाफ नहीं करते।।💐

जनता क्या उनको
ईश्वर/ख़ुदा भी माफ नहीं करते।।💐

निज़ाम बदल जाते हैं उनके
जो जनमत की
परवाह नहीं करते।।💐

यूँ नही डोल रही है ,कश्ती सागर में
भूकंपी झटकों को
अफवाह नही कहते।।💐

अन्तर्मन की गहराई में ,कुछ तो ढूंढो
होगा क्या भविष्य में
परवाह नहीं करते।।💐

गांठे खोलो, सुलझाओ ,जन गठबंधन की
आंगन की बातों को ,'
कमलेश' सरे राह नहीं करते।।💐

💐कमलेश वर्मा 'कमलेश,।

शनिवार, 15 दिसंबर 2018 | By: kamlesh chander verma

अगर तूफ़ानों का डर...!!💐

अगर तूफ़ानों का डर होता
समन्दर पार नहीं करते।💐

गर यकीं ना होता कश्ती का
लहरों पर ऐतबार नहीं करते।💐

तेरे मान जाने का तस्सवुर था
मेरे दिल में,
जरा भी शक होता
इश्क़ का इज़हार नहीं करते।💐

कमलेश' गर डर होता
इस ज़माने का,
कभी भी इस जहां में
दो दिल प्यार नहीं करते।।💐

💐कमलेश वर्मा 'कमलेश,💐💐

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018 | By: kamlesh chander verma

यूँ ही जीवन पथ पर हम ..।।💐

यूँ ही जीवन पथ पर हम चलते रहे।
ग़म ख़ुशी इक साथ मचलते रहे।💐

कभी पाँव  फिसले जब
इस कठिन राह में
कभी फिसलते रहे और सम्भलते रहे।💐

मिले इस सफ़र में कुछ
हमदर्द भी,बेदर्द भी
कभी मिलते रहे कभी बिछड़ते रहे।💐

महल सपनों के जो
मेरी आँखों में थे
कुछ संवरते रहे कुछ बिखरते रहे।💐

कुछ लम्हों ने ज़ख़्म भी दिए
इस कठिन दौड़ में
कभी रिसते रहे कभी सिसकते रहे।💐

ज़िंदगी के झंझावत में फंसे
रिश्ते इस क़दर
कभी सुलझते रहे कभी उलझते रहे।💐

कमलेश' उलझे हैं अब तक
ज़िन्दगी के सवाल में
कभी हंसते रहे  कभी फंसते रहे।।💐

💐कमलेश वर्मा 'कमलेश'💐

शनिवार, 17 नवंबर 2018 | By: kamlesh chander verma

ज़िन्दगी में गुजरे..!!💐💐

💐💐💐💐💐💐

ज़िंदगी में गुजरे
हसीन लम्हों को ,
यूँ ही खो नही सकता।💐

संजो रखे हैं भविष्य के सपने ,
अपनी आँखों में
सपनों भरी  आँखों से,
मैं सो नही सकता।💐

मिल के देखे जो सपने ,
हमने मन की आँखों से,
ये पूँजी प्रेम की है
ये सपने खो नहीं सकता।💐

पहला और आखिरी उद्देश्य,
बस तू ही है
जो तेरा हो ना पाया तो,
किसी का हो नही सकता।।💐

तेरे अहसान की गठरी ,
मेरे सर माथे पर,
ज़माने के अहसानों को अब
कमलेश' ढो नहीं सकता।💐

@कमलेश वर्मा 'कमलेश'💐