मंगलवार, 14 अगस्त 2018 | By: kamlesh chander verma

स्वतंत्रता दिवस 2018....

💐💐स्वन्त्रता दिवस की बधाई💐

आओ मिल कर जश्न मनाएं ,हम अपनी आज़ादी का।
आओ सभी तिरंगा फहराएं ,प्रतीक  हमारी आज़ादी का।।

देखो कितने संघर्षों से पाई ,थी हमने ये आज़ादी।
असँख्य बलिदानों से घर आई ,आज़ादी की शहज़ादी।।

इस गुलशन के कितने सितारे ,राहों में ही छूट गए।
कितने गुलदस्ते जो अपने थे, हठ में आ कर फूट गए।।

ये इतिहास की बातें हैं ,जिनका स्मरण आज ज़रूरी है।
बलिदानों की गाथा बिन ये आज़ादी लगती अधूरी है।।

एक तरफ थी भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरू, आज़ाद की जांबाज़ी ।
जिनकी दहशत में अंग्रेजों ने दे दी थी उनको फांसी।।

15 अगस्त को मिली आज़ादी ,सब तरफ ईद ,दीवाली थी।
नहीं पता था जिन्ना ,अंग्रेजों ,की नीयत बन चुकी काली थी।।

जश्ने आज़ादी में ही बंटवारे का ,खेल वक़्त ने खेल दिया।
हंसते बसते परिवारों को बर्बादी की, गर्त में ठेल दिया।।

बन गई देशों की सीमाएं ,अपने कुछ अपनों से दूर हुए।
खुश थे कुछ गमगीन हुए,कुछ किस्मत से मजबूर हुए।।

हम आज़ादी के पंख लगाकर ,उड़ते हैं गगन की छावों में।
हर तरफ तरक्की दिखती है ,देखो शहरों और गांवों में।।

है अपना विधान,और संविधान ,औऱ अपनी शान तिरंगा है।
है माँ तुल्य बहती कलकल ,जहां नदियां यमुना गंगा हैं।।

कमलेश'कठिन है इस देश का ,जितना भी गुणगान करें।
अपनी अमूल्य आज़ादी का ,सब मिल कर सम्मान करें।।
               ।जय हिंद।

बुधवार, 8 अगस्त 2018 | By: kamlesh chander verma

देश हमारा आज खड़ा है.. ।।

देश हमारा आज खड़ा है ,आतंकवाद की ढेरी पर।
लगा हुआ है प्रश्न चिन्ह ?  देश की रणभेरी पर ।।

हर  दिन रक्त रंजित होती ,है धरा इस देश की
एक प्रदेश की है नहीं कहानी  ,है ये पूरे देश की।।

जब चाहे कोई पड़ोसी ,देश की दीवारें तोड़ दे।
सदियों के प्यार मुहब्बत के ,गुलशन में बम फोड़ दे ।।

कत्लो-गारत की जगहें ,कितनी और बनानी है।
कबूतर  ले हम घूम रहे ,वो करता मन मानी है।।

हैं हम अहिंसा के उपासक ,दुनिया ने ये मानी है।
पर अपनों की मौत देख ,ये उपदेश यहां बेमानी है।।

कौन मरा इन हमलों मे ,किसी की नही निशानी है।
उसकी ना कोई जात पात ,वो केवल हिंदुस्तानी है।।

बहुत हुई अब प्यार मुहब्बत ,और पड़ोसी भाई भाई के ।।
ऐसा हो कोई और म्यांमार ,दुनिया को जो दिखाई दे ।।

सवा करोड़ जनों की इच्छा ,अब इससे बावस्ता है ।
बता दो अब दुनिया को ,यहां खून नहीं अब सस्ता है।।

कमलेश" दुनिया में  फैला ,अविश्वास है जिन बातों का।
बस दिखा दो अपना जलवा ,और उनकी औक़ातों का ।।

@कमलेश वर्मा 'कमलेश'💐💐

रविवार, 29 जुलाई 2018 | By: kamlesh chander verma

कैसे गले लगाओगे....💐

कैसे गले लगाओगे , इन पत्थरबाजी के सांपों को।
वीर जवानों का जो खून बहा, खुश करते हैं अपने बापों को।।

कब तक इनकी गद्दारी को ,देश हमारा झेलेगा,
दुश्मन इनके कंधो पर चढ़ ,खून की होली खेलेगा।।

मजाक बना डाला गद्दारों ने ,इतनी बड़ी आबादी का।
कत्लों गारत की साज़िश है ,ज़न्नत की बर्बादी का।।

नापाक मुल्क की साज़िश के ,ये गद्दार प्यादे हैं,
सबकी बात नहीं करते ,कुछ कम कुछ ज्यादे  हैं।।

कश्मीर को कोई तोड़ सके ,किसी के बस की बात नहीं,
पाक परस्तों की छोड़ो ,दुनिया में किसी की औक़ात नहीं।।

श्मशान बना कर ज़न्नत को, मिल जाएगी इन्हें आज़ादी।
आज़ादी तो मिलने से रही,इनकी  की होगी बर्बादी।।

विश्वास करो देश पर अपने,देश तुम्हारे साथ है,
प्रगति करो या रहो खड़े ये अब सब तुम्हारे हाथ है।।

बहुत दिनों तक ये प्रपंच, देश नहीं सह पायेगा।
कब तक हमारी घाटी में ,विदेशी ध्वज फहराएगा।

आतंकवाद के झंडे को गर कोई कहीं  लहराएगा।
जिसके हाथ में गर दिख गया झंडा ,सीधा ऊपर जाएगा।

जिनको अपने देश,ध्वज का ,आता करना सम्मान नहीं।
कमलेश' ऐसे गद्दारों की ,है जगह श्मशान सही।।

💐कमलेश वर्मा 'कमलेश "💐

दुनिया की नज़रों में...।

दुनिया की नज़रों में ,शराफ़त का लबादा ओढ़ लेते हैं।
बड़ी सफ़ाई से अपनी ,हक़ीक़त से मुंह मोड़ लेते हैं।।

चाहे जल जाए मिट जाए ये ,हरा भरा गुलशन,
मज़हबी नफरत की ज़हरीली ,छींटे छोड़ देते हैं।।

आसमाँ में छाये हों चाहे, अमनो अमान के बादल,
इसमें भी फिरकापरस्ती का , ये रंग जोड़ लेते हैं।।

फ़रेबी शक़्लो सूरत से , इनकी मुतमईन मत होना ।
हिसाबे वक़्त से ये मुखौटे ,चेहरे पर ओढ़ लेते हैं।।

अपने वादों इरादों से ,बड़ा सरोकार रखते हैं।
मक़सद पूरा होते ही ,उसे ख़ुद ही
तोड़ देते हैं।

पहचानों इनकी शातिर ,मज़हबी सोच की चालों को,
अमन के नाम पर 'कमलेश' ,ये
नफ़रत का कोढ़ देते हैं।।

💐कमलेश वर्मा 'कमलेश'💐