अनायास ही . . लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अनायास ही . . लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 15 मई 2013 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

क्यों पंछी हुआ उदास...!!! पलायन का दर्द ?..

क्यों पंछी हुआ उदास ,अपना नीड़ छोड़ कर ,
जिसे  संजोया था ,तिनका -तिनका जोड़ कर। 

न किया गिला किसी से ,न शिकायत किसी की ,
चुप-चाप उड़ चला वो ,अपनी पीड़ ओढ़कर। 

मुड़ के देखा तो था , पड़ा बिखरा हुआ अतीत ,
पर जा रहा था वो,कुछ सच्चे रिश्ते तोड़ कर। 

खट्टी-मीठी यादे चल रहीं थी ,चलचित्र की तरह ,
दिल करता था  देखता रहे, चित्रों को जोड़ कर। 

टीस सी उठ रही है दिल में , उस  दर  को छोड़ते ,
है! इल्तिजा वक्त से ,ले आये वो  ''वक्त'' मोड़ कर।

'कमलेश'कहते हैं ये सब ,किश्मत का रचा खेल है ,
कभी कौन ? शौक से गया है ,अपना ''नीड़ ''छोड़ कर।।


सोमवार, 20 जुलाई 2009 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

अगर अहसास हो जाए कहीं ..!!!

इस मंजर को ना देखे कोई ,
क्यों
की यह पागलों की बस्ती है !!,
यहाँ जिन्दगी मजबूर नज़र आएगी,
!
पर अहसासों की मौत सस्ती है !!
नज़र फेर लो  दुनिया वालों ,
तुम्हारी
दुनिया अलग बसती है !!
टपकता होगा तुम्हारे घरों में पानी,
इधर
जख्मों से जिन्दगी रिसती है !!
यह शायद तुमको अजीब लगेकमलेश 
पर इसमें भी एक अजीब सी मस्ती है !!!!