सोमवार, 16 जुलाई 2012 | By: kamlesh chander verma

अपने इम्तिहान से...!!!

आदमी डरता है हमेशा अपने इम्तिहान से ,
खौफ जदा रहता है खुद के नुकसान से

ना फ़िक्र है ज़माने की ,ना दहशत है खुदा की ,
हमेशा खौफ खाता है ,सिर्फ इन्सान से

अपनी करतूतों का कोई ख्याल नही उसको ,
दूसरो को नसीहत ''काम करो इमान से''

जबकि सब हैं उस खुदा की नियामत यहाँ ,
कुछ सोचतें है वह टपके हैं आसमान से

''कमलेश''कभी क्यों नही सोचते ये नादाँ ,
गर डरना है तो डरो उस ,खुदा भगवान से


5 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (17-07-2012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत खूब ...

आपके इस खूबसूरत पोस्ट का एक कतरा हमने सहेज लिया है, तेजाब :- मनचलों का हथियार - ब्लॉग बुलेटिन, के लिए, पाठक आपकी पोस्टों तक पहुंचें और आप उनकी पोस्टों तक, यही उद्देश्य है हमारा, उम्मीद है आपको निराशा नहीं होगी, टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें … धन्यवाद !

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

क्या आज के इंसान से किसी से डरना सीखा हैं ?

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव ग़ज़ल की उम्दा कोशिश शुभकामनायें

सुशील ने कहा…

बहुत संदर प्रस्तुति !