शनिवार, 31 मार्च 2018 | By: kamlesh chander verma

ना आई सदा...!!

ना आई अब तक सदा ,उस मोड़ से,
जहां हुए थे हम जुदा, सब छोड़ के।

गमे जुदाई है इक  ,ज़हर ज़िन्दगी में,
होता है धीरे धीरे असर,ज़िन्दगी में।

सब कुछ रुक जाएगा, एकदम एक दिन,
साथ छोड़ देगी ,सांसों की हवा एक दिन।

उसके दीदार को ,अपने सच्चे प्यार को,
चाहूं  पाना अपने,खोए वफ़ाए इज़हार को।

मुड़ के इक दिन फिर से ,मेरे हज़ूर आएंगे,
बागे गुलशन ज़िन्दगी के,मेरे महक जाएंगे।

कमलेश'हर पल  होंगी बहारें,हमारी ज़िंदगी में,
हमेशा बरसें प्यार की फुहारें ,तुम्हारी ज़िन्दगी में ।।