सोमवार, 20 जून 2011 | By: kamlesh chander verma

हर मोड़ जिंदगी का ..!!


हर मोड़ जिंदगी का लगे , है इक सीधा रास्ता ,
जिसके हर मोड़ से लगे ,है सीधा वास्ता ,

उन लम्हों को सजा रखा है, दिल के फूलदानों में ,
हसरतों ने महफूज़ किया ,जिन्हें वक्त के तूफानों में ,

नजर भर कर देखें तो कहते ,क्या हुआ प्यार है ,
ना देखा जब उस नजर से ,तो हुआ जीना दुश्वार है ,

इस कदर हो बंदिशें जमाने की, जिन्दगी जीने पर ,
तो जमाना क्यों हलकान होता है, हमारे पीने पर ,

मिले सबको किसी की चाहत ,ये नही कोई जरूरी है ,
दुनिया में कितनो की अब तक, हसरत रही अधूरी है ,

'कमलेश' कभी वक्त की कश्ती रुकी नही किनारे पर ,
किनारा खुद आ मिले कश्ती को, वक्त के इशारे पर ॥




3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

'कमलेश' कभी वक्त की कश्ती रुकी नही किनारे पर ,
किनारा खुद आ मिले कश्ती को, वक्त के इशारे पर ॥
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बहुत उम्दा ग़जल!

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! बेहतरीन....