गुरुवार, 17 जून 2010 | By: kamlesh chander verma

कौन कहता है ..............मै इन्सान नहीं हूँ ..!!


कौन कहता है ........मै इन्सान नहीं हूँ ,
हरकतें तो वही हैं ,मतलब भगवान नहीं हूँ

मन में सब दुनियावी इच्छओं का ढेर लगा है ,
सब है फिर भी मुझको भी, ९९ का फेर लगा है

मन की सारी चिंताएं बिलकुल, सबके जैसी हैं ,
मेरी हैं सबसे अलग, तुम्हारी बताना कैसी है

हम तो सबका भला मांगते, ऐसा मन कहता है ,
पर हमेशा अपने भले की ,दुआ ये मन करता है

हूँ इन्सान पर कहता हूँ'' मै बेईमान नही हूँ '',
अगर यह सच है, तो लगता है ''इन्सान नही हूँ

सारी खूबियाँ जब मुझमे है ,तो इसमें क्या है शक ॥?
''कमलेश'' भजो भगवान को , इन्सान बनने तक



8 comments:

Etips-Blog ने कहा…

कौन कहता है मै इन्सान नही हू। अपने अपने हाथ उठालो, अरे लिस्ट तो बङी लम्बी है ।

श्यामल सुमन ने कहा…

आप सचमुच इन्सान हैं कमलेश भाई - तभी तो ये भाव उभरकर आये।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

M VERMA ने कहा…

इंसान की पहचान इंसानियत से ही है
सुन्दर रचना

दिलीप ने कहा…

waah bahut khoob...

उम्मेद ने कहा…

सच्चे इन्सान की तलाश करती सशक्त रचना....बधाई।

Udan Tashtari ने कहा…

मन में सब दुनियावी इच्छओं का ढेर लगा है ,
सब है फिर भी मुझको भी, ९९ का फेर लगा है

-क्या बात है, बहुत खूब!!

महफूज़ अली ने कहा…

आपने हमेशा की तरह लाजवाब कर दिया...

kunwarji's ने कहा…

"हूँ इन्सान पर कहता हूँ'' मै बेईमान नही हूँ '',
अगर यह सच है, तो लगता है ''इन्सान नही हूँ ॥"

bilkulsahi baat hai ji...shaandar.

kunwar ji,