शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013 | By: kamlesh chander verma

यूँ तो तेरा ही नाम .....!!!





यूँ तो तेरा ही नाम ,  बसा है सबके दिल में ,
होती है तेरी ही चर्चा, दिल जलों की महफ़िल मे। 

तेरी अदा  के मारे  ,जीते हैं न मरते हैं ,
कर  गये कितने कूच , 'ले'हसरतों को दिल में। 


अब न रही कोई ख्वाहिश ,  न बाकि कोई तमन्ना ,
बस  तू  ही तू है ,उनकी नजर की  मंजिल  में। 

कोशिस सभी की है,  बस  जाएँ आँखों में तेरी ,
पर होती नही कोई हलचल, तेरे इस संग-दिल में। 

अब''कमलेश'' क्यों तराशूं  , उनकी यादों के बुत को ,
जब की होती है उन्ही की चर्चा , हर महफिल में।। यूँ तो तेरा .............[० ]



4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!
साझा करने के लिए धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!
साझा करने के लिए धन्यवाद!

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

वाह बहुत खूब