शनिवार, 28 नवंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

तुम झांको मेरी आँखों में ...!!!

तुम झांको मेरी आँखों में ,जरा करीब से ,
न नापो अरमानों को ज़माने की ज़रीब से ।

''कभी न मिले दो दिल '',
ये तो ज़माने की फितरत है ,

तुम तो मिल जाओ ,अब
जब मिले हो नसीब से ।

इल्जाम देना तो, जमाने का काम है ,
प्यार करना भी तो सीखा है ,
अपनी ही तहजीब से ।

तूफ़ान बरपा हो गया ,
ज़माने की गलियों में ,
हमने कदम निकाले भी ,
नही थे ,दहलीज से ।

''कमलेश'' गुनाह पूछा भी नही ,
कत्ल कर दिया ,
खुदा इनको बचा ले ,
इस गुनाहे अज़ीम से ॥

4 comments:

M VERMA ने कहा…

तूफ़ान बरपा हो गया ,
ज़माने की गलियों में ,
हमने कदम निकाले भी ,
नही थे ,दहलीज से
वाह लाजवाब

अर्शिया ने कहा…

कमलेश जी, बहुत सुंदर गजल कही है आपने। बधाई।
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भीड़ है कयामत की, फिरभी हम अकेले हैं।
इस चर्चित पेन्टिंग को तो पहचानते ही होंगे?

राजेश बुढाथोकी 'नताम्स' ने कहा…

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Suman ने कहा…

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