सोमवार, 6 जून 2011 | By: kamlesh chander verma

बदली हुई फिजा है हिंदुस्तान की ..

बदली -बदली सी फिजा ,लग रही है हिंदुस्तान की ,
कुछ ज्यादा ही कीमत ,बढ़ गयी है सच्चे इमान की ,

आसन नही है चलना ,सत्य -पथ की ये राहें ,
तू राही चलता चल ,हो कितनी ही बाधाएँ ,

मिल जाएगी तुझको तेरी मंजिल ,
हर भारतवासी मन कहता है ,
जिस रावण से तू हुआ त्रस्त
,वो इनके बीच में ही रहता है

आएँगी तेरी डगर में छल-प्रपंच की दीवारें ,
तनी मिलेंगी पग-पग-,षड्यंत्रों की तलवारें

हर दिल तेरी फतह की खातिर ,तन-मन से तेरे साथ है
तू बना उम्मीद की रेखा ,जो समझे अपने को अनाथ हैं

'कमलेश 'चला चले इसी वेग से ,''अन्ना''अब बन ये तूफ़ान घना ,
बहुत वक्त के बाद 'शायद' अब ये असली हिंदुस्तान बना



2 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

कमलेश 'चला चले इसी वेग से ,''अन्ना''अब बन ये तूफ़ान घना ,
बहुत वक्त के बाद 'शायद' अब ये असली हिंदुस्तान बना

-सब को एक साथ आता देख एक उम्मीद की किरण दिखती है.

अच्छी रचना.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

Desh bhakti ke bhaw jagatee achchi rachana.