सोमवार, 20 अगस्त 2012 | By: kamlesh chander verma

हंसी बेशकीमती है,,,,,खुल कर हंसो ..!!!


ना हंसी की कोई कीमत दे पाया, ना रोने का कोई मूल्य उतारेगा ,
बस अगर कोई दे पाया हंसी , उसी हंसी से उसको संवारेगा ।

हंसने को कोई भी हंस दे ,पर उसमे दिल की गहराई हो ,
हंसने की वजह हो जायज , जो दिल से बाहर आयी हो ।

हंसना ऐसी प्रकिर्या है कुदरत से ,सबको मिलती है ,
कोई अंदर दफन रखता है ,चेहरे पर किसी के खिलती है

खुलकर हंसना जिन्दगी में ,रब की एक नियामत है,
पर किसी का किसी पर हंसना ,उसके लिये कयामत है।

'कमलेश' ख़ुशी मनाएं खुलकर, जोर=जोर से हंस कर ,
दो सबको हंसी - ख़ुशी उनके, मन-मानस में बस कर ॥