शुक्रवार, 4 मई 2018 | By: kamlesh chander verma

जब तक तेरा इन आँखों...।।

जब तक तेरा इन आँखों को, इंतजार रहेगा।
बन कर अश्क़ मेरी इन आँखों से ,प्यार बहेगा।।

पलकें खुली रहेंगी ,ये उम्र भर के लिए, साँसों का ज़िस्म पर, जब तक अख्तियार रहेगा।।

क्यूँ कर कोई चाहेगा ये, बन्द हो आंखे,
जब तक तेरी चाहत का, छाया ख़ुमार रहेगा।।

ये तो मुरीद हैं तेरे, दीदार की खातिर,
इनका ये इसरार हमेशा ,हर बार रहेगा।।

कोई और बस जाए ,इन आँखों में आ के,
इनका इंकार इक बार नहीं ,सौ बार रहेगा।।

कमलेश'अलग ही मज़ा है ,इस ज़ुनून का,
हो गया बस इंतज़ाम, मेरे दिले सकून का,
बस इक ही नशा है वो,प्यार प्यार रहेगा ।।

@कमलेश वर्मा, कमलेश,

1 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-05-2017) को "इंतजार रहेगा" (चर्चा अंक-2961) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'