बुधवार, 13 अप्रैल 2011 | By: kamlesh chander verma

परिवर्तन की लहर ..!!

जमाने में अब एक लहर आ रही है ,
सुनहरे रंगों भरी इक सहर आ रही है ,

कोई देखे ना देखे इसके ज़लाल को ,
बन के जलजला और कहर आ रही है ,

जो समझते है इसे सिर्फ पत्तों का धुवां ,
तपिश उसकी सबको अभी से नजर आ रही है ,

हिल जाएँगी उनकी भी इमानो की चूलें ,
अब तक जो वक़्त से बे-असर आ रही हैं ,

वो बे-जुबां भी अब बोलने लगे हैं ,ज़नाब ,
'कमलेश'अब जंतर-मन्तर से , सही खबर आ रही है

1 comments:

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर लाजवाब रचना| धन्यवाद|