गुरुवार, 23 जून 2011 | By: kamlesh chander verma

क्या दोनों तरफ से निकल चुकी हैं,.....!!

क्या  दोनों तरफ से निकल चुकी हैं, तलवारें  म्यानों से ,
क्या फिर निकलेगा जन-सैलाब, अपने आशियानों से ,

फिर क्या हुंकार भरेगा 'अन्ना' का जन्तर- मन्तर,
या समय प्रदर्शित करेगा, कोई अद्भुत  अंतर ,

बड़े असमंजस में  है जनमानस, इस अवसर पर ,
बीच चौराहे  देश खड़ा, खुद को पाता  है अक्सर , 

क्या मंशा है ?किसकी सच्ची ?ये फैसला कौन करे ,
 बिल जन लोकपाल का  हो पास,  ये हौसला कौन करे ,

'कमलेश' क्या विडम्बना है ! इस  देश के लिए ,
खून बहाना पड़ता है ,इक राजसी आदेश के लिए..  जय हिंद !!

4 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

निकलना ही होगा जन सैलाब को फिर अपने आशियानों से....


बेहतरीन!

: केवल राम : ने कहा…

क्या मंशा है ?किसकी सच्ची ?ये फैसला कौन करे ,
बिल जन लोकपाल का हो पास, ये हौसला कौन करे ,

वर्तमान हालात पर सटीक है यह रचना ...आपका आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति ...अच्छा चिंतन है