रविवार, 11 अक्तूबर 2009 | By: kamlesh chander verma

जीवन दूभर हो गया ...!!!

जीवन दूभर हो गया इस महंगाई में आज ,

पूरी स्पर्धा कर रहा आलू संग प्याज

किसी सब्जी कोहाथ लगाओ लगता है झटका ,

- किलो आलू प्याज में लगता २०० का फटका

कैसे कोई गरीब झेलेगा महंगाई की मार ,

खुस हो कर आढ़ती कर रहा व्यापार

बरसात हुई पुणे में ,पंजाब में बढ़ गए दाम ,

तीन के तेरह जो करते यह उनका है काम

इस तरह की मंशा पर रोक लगानी होगी ,

गरीब के बच्चे के मुह की रोटी बचानी होगी

इच्छा शक्ति ,दृढ़ निश्चय से हो सकता ये काम ,

''कमलेश'' या तो इन्हे सरकार बचाए ,

या इन्हे बचाएं ,खुदा ,यीशु या राम

4 comments:

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढिया सामयिक रचना है।बाधाई स्वीकारें।

ओम आर्य ने कहा…

BILKUL SAMSAAMYIK RACHANAA .....SACH HAI IS MAHANGAI SE NA JANE KITANE TARAH KE HINSAA JANM LE ......

ओम आर्य ने कहा…

BILKUL SAMASAAMYIK RACHANA .....MAHNGAI KI MAR NA JANE OUR KAI TARAH KI BURAAEE KO JANMA DE

M VERMA ने कहा…

वस्तुस्थिति तो यही है.
सामयिक रचना