सोमवार, 20 जुलाई 2009 | By: kamlesh chander verma

अगर अहसास हो जाए कहीं ..!!!

इस मंजर को ना देखे कोई ,
क्यों
की यह पागलों की बस्ती है !!,
यहाँ जिन्दगी मजबूर नज़र आएगी,
!
पर अहसासों की मौत सस्ती है !!
नज़र फेर लो  दुनिया वालों ,
तुम्हारी
दुनिया अलग बसती है !!
टपकता होगा तुम्हारे घरों में पानी,
इधर
जख्मों से जिन्दगी रिसती है !!
यह शायद तुमको अजीब लगेकमलेश 
पर इसमें भी एक अजीब सी मस्ती है !!!!