बुधवार, 22 अगस्त 2012 | By: kamlesh chander verma

इन गद्दारों की करतूतों...!!!

इन गद्दारों की करतूतों से, क्यूँ नही लहू उबलता है ,
जमा
फौलाद है जो सीने में,वो क्यूँ नही पिघलता है ।

क्ब तक इन गद्दारों की कायरता को, अपने सिर पर ढोएंगे ,
क्या फसल केसर की काटेंगे ,जब हम बीज बबूल के बोयेंगे ।

कभी कारण पाकिस्तानी होता, है कभी बहाना बंगलादेशी ?
मगर अफ़सोस है इतना , हमेशा प्यादा होता कोई ''स्वदेशी' ।

पता नही क्या कारण है ,ये अपने क्यों नही बन पाते हैं।
शायद इनकी फितरत है '' यहाँ खाते हैं और वहां की गाते हैं ।

''कमलेश' इन बातों से हम और देश ,बहुत बदनाम होता है
हम 'धर्मनिरपेक्ष ' राष्ट्र है बस इसी बात का मान होता है ..