बुधवार, 20 मार्च 2013 | By: kamlesh chander verma

लहराती जुल्फों की बात चली...!!!

लहराती जुल्फों की बात  चली ,तो तेरा ही ख्याल आया,
इनमे कौन  छुपा था  चेहरा ,ये  सवाल  आया।

क्यूँ नही मुडती वो फिजायें,  इस गुलिस्तां  की ,
जब भी हुई दस्तक दिल में ,जिंदगी में गुलाल  आया। 

कभी हवा में हिलती दिखी , कोई साख  मुझको ,
हलचल सी उठी दिल में ,खुशियों का भूचाल   आया। 

थी इस दिल आदत , फूल और भंवरे जैसी  कभी ,
पर आज फरेबों को  कर  , वो वहीं हलाल  आया।

कोशिशें बहुत की दिल से  ,निकल जाएँ यादें तेरी ,.
जब कहीं ज़ुल्फ़ लहराई तो , तेरा ही ख्याल आया।

'कमलेश'हमेशा थिरकता है , निगाहों में चेहरा तेरा ,
तुम हो कर भी नहीं हो ,'दिल' को बहुत मलाल आया।।



1 comments:

expression ने कहा…

वाह...
बेहतरीन ग़ज़ल.....

अनु