शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011 | By: kamlesh chander verma

झूठी तस्वीर ने .... फ़साना बना दिया ..!!!

झूठी तस्वीर ने मेरा फसाना बना दिया
हूँ मै बदनाम सरे ज़माना बना दिया ,

किस्मत करेगी शिकवा बेदर्द ज़माने से ,
दर्द भरे नगमों को जिंदगी का अफसाना बना दिया ,

कहने को इस जहाँ में सभी हैं दोस्तों ,
भरी महफिल में उसने मुझे बेगाना बना दिया ,

गूंजती थी सदा दिल में तरन्नुम प्यार की ,
उसकी बेरुखी ने हाथों में पैमाना थमा दिया ,

हसरतें अभी बहुत बाकि हैं दिल--दरिया में ,
तुमने मेरे इश्क की कश्ती को भंवर में डूबा दिया ,

उस तश्वीर में तुम क्यूँ कर अकेली हो ?
जो साथ में चला था तुमने उसको भुला दिया ,

'
कमलेश' तस्वीर बना के मिटाना मुझे भी आता है ,
पर
दिल ने कहा पर ! दिल ने ही मना किया

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपने बेहतरीन ग़ज़ल लिखी है!

S.N SHUKLA ने कहा…

आपकी सुन्दर रचना पढ़ी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति , शुभकामनाएं.

S.N SHUKLA ने कहा…

आपकी सुन्दर रचना पढ़ी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति , शुभकामनाएं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

कहने को इस जहाँ में सभी हैं दोस्तों ,
भरी महफिल में उसने मुझे बेगाना बना दिया

Bahut Badhiya...