सोमवार, 9 नवंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

जिन्दगी चलती....???

जिन्दगी चलती जा रही, किस ओर है ,

मिलन इस छोर पर ,बिछुड़ना उस ओर है


सिमट जाएँगी यादें ,जहन में कहीं ,

पूछेगी जिन्दगी, ये कौन सा मोड़ है


खुश हो लेंगे हम ,मिले थे कभी ,

उन खुशनुमा लम्हों का , अहसास बेजोड़ है


क्यूँ सोचते हैं ,जुदा हो जायेंगे हम ,

क्या डोर अपने प्यार की ,इतनी कमजोर है


'
कमलेश' निभा लो जब तलक ,निभे दोस्ती ,

जिंदगी जीने की वजह ,तो कुछ और है

3 comments:

Mithilesh dubey ने कहा…

सिमट जाएँगी यादें ,जहन में कहीं ,

पूछेगी जिन्दगी, ये कौन सा मोड़ है ।

क्या खूब कहा जनाब आपने। लाजवाब लगी आपकी रचना

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

क्यूँ सोचते हैं ,जुदा हो जायेंगे हम ,

क्या डोर अपने प्यार की ,इतनी कमजोर है ।
सुन्दर रचना

M VERMA ने कहा…

क्यूँ सोचते हैं ,जुदा हो जायेंगे हम ,
क्या डोर अपने प्यार की ,इतनी कमजोर है ।
बहुत सुन्दर