रविवार, 18 दिसंबर 2011 | By: kamlesh chander verma

कैसे करें यकीं कोई तेरे ....प्यार का ..!!!!


कैसे करें यकीं कोई ,तेरे प्यार का ,
था अजीब सा सलीका ,इजहारे-प्यार का ।

ना थी गर्मजोशी ना ,अपनेपन का रंग था ,
तेरे इस अदा से सारा ,जहाँ दंग था ।
क्या करूं मै तेरे इस सरोकार का ...........!

हमने बिछा दी पलकें ,तेरी राह में ,
बसा रखी है तेरे सूरत ,अपने ख्वाब-गाह में ,
मिलेगा सिला तुमको इंतजार का .........!

दुश्मन बना जमाना ,हमें मंजूर था ,
तेरी चाहत का चढ़ा ,आँखों में सरूर था ।
पर आया ना इशारा तेरे इकरार का .......!

मंजिल पर पहुंचना , सबका नसीब हो ,
जो दूर हो किसी का ,उसके करीब हो ,
न हो 'कमलेश 'नाज़ुक धागा तेरे ऐतबार का .......!