सोमवार, 26 दिसंबर 2011 | By: kamlesh chander verma

क्रांति की मशाल ना ...धीमी पड़नी चाहिए.....!!!


क्रांति की मशाल ना धीमी पड़नी चाहिए ,
क्रांति की धूल हर ओर उड्नी चाहिए ,

हर तरफ हो चाहे काँटों की दीवारें मगर ,
उत्साह और उमंग की पतंग चढनी चाहिए ,

कितने भी आयें अवरोध हमारी राह में ,
हर कदम की रेखा ऊपर को बढनी चाहिए ,

आखिर में झुकेगा हिमालय भी इसी राह में ,
जन -तपिश से संसद भी पिघलनी चाहिए ,

जब कोई नही करता इस बात से बे-इत्फाकी ,
तो इन के ज़मीरों की नीवं जरूर हिलनी चाहिए ,

कोई 'खैरात' नही मांगता है यह देश किसी से ,
भ्रष्टाचार पर ''कानून (Jan-Lokpal )''की लगाम लगनी चाहिए ,

जिनको लगता है जिन्न कहीं ना
निकल आये कहीं ,
'कमलेश' उनको इसकी पूरी तसल्ली मिलनी चाहिए ॥