सोमवार, 29 अगस्त 2011 | By: kamlesh chander verma

सूरज पर आग जलेगी ...!!


देखा दिल कहता था, हिम पर भी आग जलेगी !!
जो दबी पड़ी थी बरसों से, वो ज्वाला भी पिघलेगी ,।

बन गयी ज्वाला युवा-शक्ति ,अन्ना की चिगारी से ,
बिछ गये फूल अन्ना की खातिर, देश की हर क्यारी से ,.

देश -प्रेम के जज्बे को, हर दिल में इतना उभार दिया ,
हर क़ुरबानी की खातिर सबने, अपने को तय्यार किया ,.

भूखे रह कर इक सन्यासी का, चमत्कार अनोखा था ,
वो भी असमंजस में फंसे रहे, जिनके मन में धोखा था ,.

अभी आन्दोलन नही खत्म हुआ बस अनशन ही छोड़ा है ,
बस जन-मानस के हिर्द्यों को जड़ से बहुत जिन्झोड़ा है ,.

'कमलेश'अभी तो देश की कुछ ही हुई मांगे पूरी हैं ॥,
''अन्ना' के भारत की मूर्ती रहती अभी बहुत अधूरी है ..,,..


1 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर।
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भाईचारे के मुकद्दस त्यौहार पर सभी देशवासियों को ईद की दिली मुबारकवाद।
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कल गणेशचतुर्थी होगी, इसलिए गणेशचतुर्थी की भी शुभकामनाएँ!