सोमवार, 17 जनवरी 2011 | By: kamlesh chander verma

अगर हम दुनिया की ......!!!


अगर हम दुनिया की रग पहचान लेते ,
बेवफा दुनिया का क्यों अहसान लेते

अल-मस्त रहते अपनी ही दुनिया में ,
क्यूँ जिन्दगी के बदले मौत का सामान लेते

उनकी तो पहले ही तय थी मंजिल ,
हम तय कर लेते तो क्यूँ नादान कहते

मासूम चेहरे की नफासत में उलझ कर रह गए ,
उठा के पर्दा उनके चेहरे से असलियत जान लेते

''
कमलेश''अब पछताने से क्या क्या होगा फायदा ,
चलो उन लम्हों के सिवा ना था यही मान लेते