सोमवार, 17 जनवरी 2011 | By: kamlesh chander verma

झूठ उनके चेहरे का...!!!

चेहरे से उनके झूठ का नकाब उतर गया ,
पर वो हसीं ख्वाब पल में बिखर गया

उनके लिये शायद ,ये मजाक था ,
मेरी जिंदगी में ,नासूर कर गया

कैसे हो जाते हैं ,इनके दिल पत्थर के ,
मै सपने में सोच कर ,इकदम सिहर गया

जानिबे मंजिल तो हमारी बहुत दूर थी ,
साथ चलते-चलते जाने वो किधर गया

'कमलेश' वादे तो बहुत थे उनके जीने की राह में ,
पर जीते-जीते ही ,वो ख्वाब मर गया