शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2010 | By: kamlesh chander verma

रंग बदलना सीख ले ..!!


रंग बदलना सीख ले जमाने की तरह ,
ना सच को दिखा आईने की तरह

ना पकड इक साख को उल्लू की मानिंद ,
वक़्त
--हिसाब बैठ डालों पर परिंदों की तरह

ना उलझा खुद को रिश्तों की जंजीरों में ,
कर ले मद-होश अपने को रिन्दों की तरह

ना कर हलकान खुद को ,हर तरफ है मायूसी ,
हो जा बे-दिल बे-मुरव्वत परिंदों की तरह

गर मिलती है इज्ज़त यहाँ ,मरने के बाद ,
फिर
'कमलेश'क्यों जीना जिन्दों की तरह

3 comments:

ehsas ने कहा…

khoobsurat aur bhawpurna rachna.

अनुपमा पाठक ने कहा…

sundar abhivyakti!
rang badalna seekhne ki baat karti hui rachna mein kai yatharth mukhrit hue hain!
regards,

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

रंग बदलना सीख ले जमाने की तरह ,
ना सच को दिखा आईने की तरह ।
वाह बहुत खूब ।