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शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010 | By: कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹

रंग बदलना सीख ले ..!!


रंग बदलना सीख ले जमाने की तरह ,
ना सच को दिखा आईने की तरह

ना पकड इक साख को उल्लू की मानिंद ,
वक़्त
--हिसाब बैठ डालों पर परिंदों की तरह

ना उलझा खुद को रिश्तों की जंजीरों में ,
कर ले मद-होश अपने को रिन्दों की तरह

ना कर हलकान खुद को ,हर तरफ है मायूसी ,
हो जा बे-दिल बे-मुरव्वत परिंदों की तरह

गर मिलती है इज्ज़त यहाँ ,मरने के बाद ,
फिर
'कमलेश'क्यों जीना जिन्दों की तरह