बुधवार, 6 अक्तूबर 2010 | By: kamlesh chander verma

अजन्मी को दुनिया में आने दो ...!!!


ना मारो कोख में बच्चियों को ,
ऐ रब दे बन्दों अक्ल करो ,

आज के झूठे सुख की खातिर
ना अपने कल को कत्ल करो ,

ना होगी गर ये जन्म-बेल
फिर भविष्य बेल कैसे सरसेगी ;

भाई -बहन की स्नेह वर्षा
कैसे कहाँ फिर बरसेगी ,

ना आएँगी घर में बहुएं
ना कहीं बजेगी शहनाई ,

ना सजेगी राखी ''रखडी'' पर
सूनी रह जाएगी भाई की कलाई,

ना आयेंगे सज के राज कुंवर
चढ़ कर द्वारे घोड़ों पर ,

'कमलेश'बस शून्य ही शून्य होगा
जिन्दगी के आखिरी मोड़ों पर ॥