मंगलवार, 27 मार्च 2018 | By: kamlesh chander verma

होता है आज भी दर्द...!!

होता है आज भी दर्द ,उसी ठिकाने पर।
आया था दिल जिस दिन ,तेरे निशाने पर।।

टीश उठती है आह निकलती है ,होंठों से,
नहीं होने देते ज़ाहिर ,दर्दे दिल ज़माने पर।।

जब भी तेरी जुदाई के ज़ख़्म, रिसते हैं कभी,
सकून मिलता है यादों का ,मरहम लगाने पर।।

पूछते हैं सभी मेरा हाले-दिल ,अब कैसा है,
हंसते है सुनकर सब ,अच्छा है मेरे बताने पर।।

मैं कैसे बताऊं, नादान दुनिया वालों को अभी,
कितना मज़ा आता है मुझे,उसके सताने पर।।

कुछ लोग हैं जो अबतक,इससे अछूते हैं अभी,
'कमलेश' पछतायेंगे वो ,उम्र निकल जाने पर।।