रविवार, 20 जून 2010 | By: kamlesh chander verma

पिता बिना नही मिलता जीवन, ..!!

पिता बिना नही मिलता जीवन, मिलती पहचान ,
पिर्तु बिना ना मिलती जग में ,आन-बान और शान

पिता हमारे- तुम्हारे दोष- गुणों का परमाण होता है ,
तुम सगुणी तो पिता है पारस ,नही वो पाषाण होता है

अपने अक्स को खुद में नही देखता है वो ,
अपने बच्चे में अपने, आप को दूढ़ता है वो

खुद सह कर जीवन के कष्ट तमाम सदा ,
बच्चों को भगवन रखना खुशहाल सदा

''कमलेश'' वो करता रहता है यही सदा दुआ ,
तुम रहो सदा खुशहाल ,''मै जग में हुआ ना हुआ ''