बुधवार, 8 अगस्त 2018 | By: kamlesh chander verma

देश हमारा आज खड़ा है.. ।।

देश हमारा आज खड़ा है ,आतंकवाद की ढेरी पर।
लगा हुआ है प्रश्न चिन्ह ?  देश की रणभेरी पर ।।

हर  दिन रक्त रंजित होती ,है धरा इस देश की
एक प्रदेश की है नहीं कहानी  ,है ये पूरे देश की।।

जब चाहे कोई पड़ोसी ,देश की दीवारें तोड़ दे।
सदियों के प्यार मुहब्बत के ,गुलशन में बम फोड़ दे ।।

कत्लो-गारत की जगहें ,कितनी और बनानी है।
कबूतर  ले हम घूम रहे ,वो करता मन मानी है।।

हैं हम अहिंसा के उपासक ,दुनिया ने ये मानी है।
पर अपनों की मौत देख ,ये उपदेश यहां बेमानी है।।

कौन मरा इन हमलों मे ,किसी की नही निशानी है।
उसकी ना कोई जात पात ,वो केवल हिंदुस्तानी है।।

बहुत हुई अब प्यार मुहब्बत ,और पड़ोसी भाई भाई के ।।
ऐसा हो कोई और म्यांमार ,दुनिया को जो दिखाई दे ।।

सवा करोड़ जनों की इच्छा ,अब इससे बावस्ता है ।
बता दो अब दुनिया को ,यहां खून नहीं अब सस्ता है।।

कमलेश" दुनिया में  फैला ,अविश्वास है जिन बातों का।
बस दिखा दो अपना जलवा ,और उनकी औक़ातों का ।।

@कमलेश वर्मा 'कमलेश'💐💐

1 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (10-08-2018) को "कर्तव्यों के बिन नहीं, मिलते हैं अधिकार" (चर्चा अंक-3059) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'