सोमवार, 14 जून 2010 | By: kamlesh chander verma

इक बार क्या मिला वो...!!!


इक बार क्या मिला वो ,हर दिल अज़ीज़ हो गया ,
पल दो पल में वो मेरे दिल के, करीब हो गया

अनजान थे जो अब तक, उसके असरार से ,
अंजुमन में हुई जब उसकी आमद, हबीब हो गया

फिजां में ना था कही पे, उसका नामोनिशां ,
है हर शख्श की जुबां पर, यही ''मेरा नसीब हो गया

जो बदनामी के डर से, राहें अपनी बदल गए ,
हैं ! वो बने हम -सफर ,कुछ किस्सा अजीब हो गया

जिंदगी को करीने से, सजा रखी थी हमने ''कमलेश '',
उसने दस्तक दी जब से ,दिले -मंजर बे-तरतीब हो गया है

7 comments:

indli ने कहा…

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

सुनील दत्त ने कहा…

दिले -मंजर बे-तरतीब हो i/e

the best

aarya ने कहा…

सादर वन्दे !
बहुत खूब ! लेकिन आप इतनी खुबसूरत तस्वीर कहाँ से लाते है भाई जी !
रत्नेश त्रिपाठी

देव कुमार झा ने कहा…

गजब लिखा है भाई, आज पहली बार इस ब्लाग पर आया.. मजा आ गया.. वाह

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत अच्छी और शानदार पोस्ट....

Jandunia ने कहा…

nice

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन गज़ल!! बधाई...