सोमवार, 12 अप्रैल 2010 | By: kamlesh chander verma

चंद लम्हे ..उस मुलाकत के ...!!!

  • चंद लम्हों की मुलाकात बनी सबब जिन्दगी की ,
  • ता उम्र साथ मिलता तो क्या बात थी ।!

  • संवर जाती सूरत मेरे आने वाले कल की ,
  • हमेशा आफ़ताबे -नूर होता तो क्या बात थी ।!

  • यूँ छोडो भंवर में किश्ती मेरी जिन्दगी की ,
  • तुम किश्ती की पतवार बनती तो क्या बात थी ।!

  • गर डूबे जिन्दगी की मझधार में होगी रुसवाई ,
  • गर चलते साथ -साथ उस पार तो क्या बात थी ।!

  • ''कमलेश'' मुझ पर अहसान होगा इस जिन्दगी का ,
  • इक जिन्द -इक जान बन के जीते तो क्या बात थी ।!!

10 comments:

चंदन कुमार झा ने कहा…

सुन्दर पंक्तियाँ अच्छी लगी ।

Udan Tashtari ने कहा…

गर डूबे जिन्दगी की मझधार में होगी रुसवाई ,
गर चलते साथ -साथ उस पार तो क्या बात थी


-हाय!! काश! बहुत बेहतरीन वर्मा जी..आजकल क्या बात है?? सब ठीक ठाक तो है न भई.. :)

संजय भास्कर ने कहा…

सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना । आभार
ढेर सारी शुभकामनायें.

Shekhar kumawat ने कहा…

BAHUT KUHUB

SHEKHAR KUMAWAT

http://kavyawani.blogspot.com/

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

# यूँ न छोडो भंवर में किश्ती मेरी जिन्दगी की ,
# तुम किश्ती की पतवार बनती तो क्या बात थी ।!

बहुत सुन्दर भाव हैं !

sangeeta swarup ने कहा…

संवर जाती सूरत मेरे आने वाले कल की ,
हमेशा आफ़ताबे -नूर होता तो क्या बात थी

खूबसूरत ग़ज़ल....बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

गजल खूबसूरत है!
ईश्वर करे आपकी मुराद जल्द पूरी हो!

M VERMA ने कहा…

यूँ न छोडो भंवर में किश्ती मेरी जिन्दगी की ,
तुम किश्ती की पतवार बनती तो क्या बात थी ।!
सुन्दर और फिर चित्र तो क्या कहने

दिगम्बर नासवा ने कहा…

यूँ न छोडो भंवर में किश्ती मेरी जिन्दगी की ,
तुम किश्ती की पतवार बनती तो क्या बात थी ..

Vaah .. kamaaal ka sher aur bahut hi sundar chitr laga hai ... lajawaab ...