रविवार, 23 अगस्त 2009 | By: kamlesh chander verma

नेत्र - दान के प्रति अंध विश्वास !?

अगर आँखें दे दी तो ,अगले जन्म में होगा बापू अंधा ,

यह हैं सब बेकार की बातें ,है पाखंडियों का धंधा

इस जन्म में हो ? अँधा या टूटी किसी की लात ,

तो क्या पहले होती थी ? पैर -आंख दान की बात

तो फ़िर क्यों ? पैदा होते बच्चे ,लंगडे -लूले ,

अंध विश्वास के मकड़ जाल में ,

निज कर्तव्यों को भूले

करो नेत्र दान मरनोप्रान्त ,

''कमलेश ''आपकी इच्छा है

मर कर भी जी सकते हो ,

यही हमारी शिक्षा है