शनिवार, 22 अगस्त 2009 | By: kamlesh chander verma

नेत्र दान--ज्योति दान जीवन दान !!

इन्सान मरूं मै ,यह इच्छा जरूर होती है ,

कुछ ऐसा करुँ ,यह शिक्षाजरूर होती है

हो लेते हैं खुश ,जीते

जी कुछ करने के

बाद , हो संसार को खुसी ,तुम्हारे मरने के बाद ,

जाते जाते इस दुनिया से,

एक काम कर जाओ ,

इन अमूल्य आंखों को, दान कर जाओ

नेत्र तुम्हारे देंगे

दो लोगों को जोत ,

जीवन प्रकाशमय होगा ,पा नेत्रों का श्रोत

परिजन इस शरीर को ,कर देंगे खाक ,

नेत्र दान कर फैला दो जीवन में प्रकाश ,

कुछ नही जाता साथ में .कहते संत और ग्रन्थ ,

इस करके नेत्रदान करो ,अवस्य मरन उपरंत

नेत्रदान में
''कमलेश ''गर कोई ऐब होती ,

,तो दोस्तों जाते वक्त ,जरूर' कफ़न' में जेब होती