रविवार, 23 अगस्त 2009 | By: kamlesh chander verma

ब्लोगरों की माया !!

वाह ? क्या जगह ढूंढी है ,

लेखनी के परवानो ने

लेखों से सजा दिया है

ब्लॉग -रस के दीवानों ने

कहीं चहकती सुंदर मनभावन हिन्दी ,

कहीं हिन्दी के आलिंगन

,में अलिफ़ ,बे की बिंदी

कहीं ठेठ देसी भाषा ,

कहीं अपनी विदेशी आशा

कहीं भोजपुरी ठुमके ,

कहीं कनाडा और नासा

सतरंगी दुनिया का सार मिलेगा ,

क्षेत्र ,प्रान्त देश नही ,

अपितु सारा संसार मिलेगा

कोईमन में हो प्रश्न ?

कोई हो जिगियाषा

तृप्त हो कर जाएगा जितना भी हो प्यासा

एक से बढ़कर एक
''कमलेश'',

इस कारवां से जुड़े हैं

जो यहाँ समझे अपने को ''बाप ''

उनके बापों के बाप भी पड़े हैं

4 comments:

M VERMA ने कहा…

क्षेत्र ,प्रान्त देश नही ,
अपितु सारा संसार मिलेगा ।
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स्वाद तो कभी बेस्वाद मिलेगा
कभी अम्ल तो कभी क्षार मिलेगा.
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बहुत खूब लिखा है आपने ब्लोगजगत की दुनिया पर

महेन्द्र मिश्र समयचक्र ने कहा…

श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएं

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

जो यहाँ समझे अपने को ''बाप ''
उनके बापों के बाप भी पड़े हैं ॥

ये बात आपने बिल्कुल सही कही!! ये बात सिर्फ ब्लागजगत ही नहीं बल्कि जीवन के हरेक क्षेत्र मे लागू होती है।।

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

पितामह कहिए
बाप न कहिए
पिताजी कहिए।