रविवार, 29 जुलाई 2018 | By: kamlesh chander verma

दुनिया की नज़रों में...।

दुनिया की नज़रों में ,शराफ़त का लबादा ओढ़ लेते हैं।
बड़ी सफ़ाई से अपनी ,हक़ीक़त से मुंह मोड़ लेते हैं।।

चाहे जल जाए मिट जाए ये ,हरा भरा गुलशन,
मज़हबी नफरत की ज़हरीली ,छींटे छोड़ देते हैं।।

आसमाँ में छाये हों चाहे, अमनो अमान के बादल,
इसमें भी फिरकापरस्ती का , ये रंग जोड़ लेते हैं।।

फ़रेबी शक़्लो सूरत से , इनकी मुतमईन मत होना ।
हिसाबे वक़्त से ये मुखौटे ,चेहरे पर ओढ़ लेते हैं।।

अपने वादों इरादों से ,बड़ा सरोकार रखते हैं।
मक़सद पूरा होते ही ,उसे ख़ुद ही
तोड़ देते हैं।

पहचानों इनकी शातिर ,मज़हबी सोच की चालों को,
अमन के नाम पर 'कमलेश' ,ये
नफ़रत का कोढ़ देते हैं।।

💐कमलेश वर्मा 'कमलेश'💐