सोमवार, 15 अक्तूबर 2012 | By: kamlesh chander verma

जन सरोकारों की अनदेखी सरकारों का...!!!

जन सरोकारों की अनदेखी सरकारों का  फैशन हो गया ,
जन आंदोलनों को दबाना सरकारों का पैशन हो गया। 

दमनकारी नीतियों से कोई जन तन्त्र चलता नही ,
 जनआक्रोश  कुचलने से गण -तन्त्र  फूलता फलता नही. 

आप उनकी भी सुनो जिन्होंने तुमको  अपना नेता चुना है ,
पर अफ़सोस आपने इनको ही फंसाने  का फंदा बुना है। 

अब शायद नही चल पाएंगे  राजनीती के उलटे पांसे ,
होश में आओ कहीं आना न पड़े वापस वहाँ [संसद] से। 

जो हक है आम आवाम का आप उसका  उसको दीजिये ,
करके गहन समीक्षा सबकी  फिर मंत्रिमंडल में लीजिये. 

भडकाओ न जज्बातों की दिलों में जो छुपी आग है ,
क्यों की वर्तमान राजनीती की चादर में दाग ही दाग है। 

'कमलेश'राजनीति का खेल अब इक  प्रहसन हो गया है ,
जन सरोकारों की अनदेखी सरकारों का फैशन हो गया।।

1 comments:

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

पूरा राजीनीतिक रंग में डूबी हुई