गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012 | By: kamlesh chander verma

कहते हैं कभी आँखें...


कहते हैं कभी आँखें झूठ बोलती नही ,
छुपा के रखती हैं राज कभी खोलती नही।

जिसने कुछ भी छुपाने का कोई बहाना गढ़ लिया ,

जब मिली आँख  से आँख सारा मज़मून पढ़ लिया। 

जो इनमे बस  जाये वह  कभी निकलता नही ,

कितनी हो नफरत की आग पर पिघलता नही। 

आँखों की फितरत बस  आँखें ही जानती हैं  ,

जिसको बसा लें अपने में ''खुदा '' ही मानती हैं। 

जो इनको नही  पसंद ,उसकी नजरों में चढती नहीं ,

चाहे खुली हो प्यार की किताबें  कभी  पढ़ती नहीं । 

 कहतें हैं  ''कमलेश''  कभी सच्चे  प्यार में डोलती नही 

किससे हुआ है  प्यार वो राज किसी पर खोलती नहीं  !!!