शनिवार, 10 सितंबर 2011 | By: kamlesh chander verma

अँधेरे में तीर चल रहे हैं ...!!!ब्लास्ट की जाँच जारी है ...

अंधेरों में तीर चल रहे हैं ,
बम धमाको में बेगुनाह मर रहे हैं ,

क्यों चिल-पों मचा रही जनता ,
हम जाँच तो कर रहे हैं ,

पूरी जिन्दगी शायद वो ना कमा पाते इतनी रकम ,
इक मुश्त हम ''चार -छे ''लाख दे रहे हैं

विरोधी हैं देश के जो हम पर शक करते हैं ,
आपकी सुरक्षा दिन-रात हम कर रहे हैं

आप को ही नही सबको मरने से लगता है डर ,
इसका अभिप्राय कदाचित नही की हम डर रहे हैं
''कमलेश''

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

बड़ा ही सटीक तीर चलाया है,बढ़िया रचना.

Patali-The-Village ने कहा…

सुन्दर और सार्थक व्यंग| धन्यवाद|

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

bilkul sahi nishana ......... 4, 6 lakh to de rahe hain ...achha vyngya