शनिवार, 31 अक्तूबर 2009 | By: kamlesh chander verma

क्यों नही समझते..???

क्यों नही समझते ,
किसी का दर्द ,बेबसी

क्यों मुस्कराते हो तुम ,
गर मेरी जान जाती है ,

ख़ुद को देखती हो,
जब आईने में

,
ख़ुद को पा लेती हो
,
पर मेरी पहचान जाती है

ख़ुद को खुश कर लो,
यह तुम्हारी गफलत है

मुझे हो तकलीफ तो ,
तुम्हारी मुस्कान जाती है

याद
करके तडफ उठती मेरी रूह ,
सूरत
तेरी यादों में तूफ़ान लाती है

''
कमलेश''दिल में बसा रखना,
मेरी यादों को ,
जब
''याद''आती है,
तो यही फरमान लाती है

2 comments:

M VERMA ने कहा…

याद करके तडफ उठती मेरी रूह ,
सूरत तेरी यादों में तूफ़ान लाती है ।
बहुत खूब क्या एहसास है!
बहुत सुन्दर रचना

ओम आर्य ने कहा…

बहुत ही भावमय है आपकी रचना!!!!!!!!

बधाई!