बुधवार, 4 नवंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

कहने को सब यहाँ...!!!!

कहने को सब यहाँ,अपने खास - खास ,
रिश्ते हैं ये मतलब के बाकी सब बकवास

मतलब हो तो ''तुम ''भी ''आप '' होजाता है ,
नही तो रिश्ता रिसते-रिसते रिस जाता है

मतलब होतो खून का कोई नही है भेद ,
नही तो अपना खून भी हो जाय सफ़ेद

मतलब हो तो दिख जाए हो चाहे जितनी दूर ,
पलकों के नीचे दिखे ,लाख कोशिस करो हजूर

''
कमलेश'' मतलब से करो ,प्यार प्रेम परिहास ,
मत ''लब '' खोलो फालतू ,जहाँ हो अति विस्वास

1 comments:

श्यामल सुमन ने कहा…

मतलब होतो खून का कोई नही है भेद ,
नही तो अपना खून भी हो जाय सफ़ेद ॥

अच्छे भाव की प्रस्तुति। मैं भी आपके भाव समर्थन में कुछ यूँ कहना चाहता हूँ-

खून के रिश्ते खूनी रिश्ते।
बन जाते हैं रिसते रिसते।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com