गुरुवार, 24 सितंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

ये ख्याले दिल ..!!!क्यूँ आया ना


ये ख्याले दिल
क्यूँ ? आया कभी ;


कोई इस दिल को
क्यूँ ? भाया कभी;


शिकवा रहेगा सदा
''दिल '' से 'ख्याल' को ;


क्यूँ ? न इस ने कहीं
दिल लगाया कभी ;


देर हो जाए कहीं
कर गुनाह ले तू यहीं,


करे शिकवा कोई दिल
क्यूँ ? तड़पाया ना कभी ;


''कमलेश'' ये बात है दिल की
लाख कोशिश की पर
जुबां पर लाया ना कभी॥ ;


ये ख्याले दिल क्यूँ आयाकभी .........

3 comments:

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत ही उम्दा व दिल से लिखी गयी लाजवाब रचना। बहुत-बहुत बधाई.....

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत खूब कमलेश भाई!! जारी रहो!!

वाणी गीत ने कहा…

अच्छा है ...ये ख्याल आया ना कभी ...दिलजलों से पूछ कर देखिये ...!!