बुधवार, 23 सितंबर 2009 | By: kamlesh chander verma

अपने ही देश...मन का दर्द ..!!!

अपने ही देश में बेगाने हो गये हैं ,

यहाँ के लोग रुपय्या हम आने हो गए हैं ,



जिनकी मेहनत से है इनकी मूछ ऊँची ,वही

इनकी नजरों में बेमाने हो गए हैं ,



इन्सान ही इन्सान को कमतर है आंकता ,

इनके औरों के लिए अलग पैमाने हो गए हैं ,



साथ- होने का जो दम भरते ,,

सबसे अधिक भेदभाव यही करते ,


कसूर है उन सरकारों का,

जो नही रख पाती ख्याल बे-रोजगारों का



क्षेत्र वाद के मारे ये अंधे हो गये हैं ,

जिनकी थी भी दो आँखें,

,''कमलेश ''वो भी काने हो गए हैं






4 comments:

ओम आर्य ने कहा…

वाह क्या बात है /खरी खरी /बधाई!

SUNIL DOGRA जालि‍म ने कहा…

अपना देश है तभी तो दर्द है

Mithilesh dubey ने कहा…

भाई वाह क्या बात है, सच्चाई को उकेरति लाजवाब रचना।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत लाजबाब!!

अपने ही देश में बेगाने हो गये हैं ,
यहाँ के लोग रुपय्या हम आने हो गए हैं.

-वाह!



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एड की डिटेल भेजिये. आपने ध्यान रखा, अनुग्रहित हूँ. sameer.lal AT gmail.com पर बताईयेगा.

आभार