मंगलवार, 21 जुलाई 2009 | By: kamlesh chander verma

जब आप हमारे साथ थे ..?

ये उन् दिनों की बात है जब की तुम हमारे साथ थे !!!

जिंदगी जागीजागी सी थी ,
सारे मौसम बड़े मेहरबा दोस्त थे ,

रास्ते दावतनामे थे ,
जो मंजिलो ने लिखे थे ,
ज़मी पर हमारे लिए ,

पेड़ बांहे पसारे खड़े थे ,
हमें छांव की शाल पहनाने के वास्ते ,

शाम को सब सितारे बहुत मुस्कुराते थे ,
जब देखते थे हमे ,

आतीजाती हवाएं कोई गीत खुशबू का गाती हुई i,
छेड़ती थी गुज़र जाती थी ,

आशमा पिघले नीलाम का एक गहरा तालाब था ,
जिसमे हर रात एक चाँद का फूल खिलता था ,
और पिघले नीलाम की लहरों में हमारे हुआ ,
वो हमारे के किनारों को छु लेता था ,

उन् दिनों जब की तुम हमारे साथ थे !