बुधवार, 22 जुलाई 2009 | By: kamlesh chander verma

मंजिल



गर मंजिल हो कठिन , रास्ता दुस्वार हो जाए,
,
हिम्मत
तो जायगी , बस किसी से प्यार हो जाए !!

प्यार में पार दरिया , कर जायेंगे , मगर ,!
मेरी
हसरत की नाव की , तेरी उल्फत पतवार हो जाए,!!

जायें ज़न्नत में, कोई गम नही !,
बस
एक बार तेरे, रूप का दीदार हो जाए ,!!

मर भी गए हम ,तो कोई बात नही ,,!
जिसके
लिए गई, जान उसे ऐतबार हो जाए !!

उम्मीदों का समंदर काफी गहरा है ,
सहारा देना कही"
न मझधार हो जाए !!

चलेंगे जरूर साथ ..,
पर
साथ देने का इकरार हो जाए !!

कुछ भी कर गुजरेंगे ,ज़माने के लोग ,
बस
''कमलेश ''उनको किसी से प्यार हो जाए !!!

5 comments:

श्यामल सुमन ने कहा…

अच्छी कोशिश आपकी बात कहने की। पोस्ट कुछ इस तरह से करें जो रचना देखने में कविता या गजल की तरह लगे। "मझदार न हो जाए" को "न मझधार हो जाए" लिखने से कैसा रहेगा?

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

M VERMA ने कहा…

बहुत खूब

वाणी गीत ने कहा…

जिसके लिए जान गयी ...उसे ऐतबार हो जाये !!

AlbelaKhatri.com ने कहा…

achha laga.......
abhinandan !

सुलभ [Sulabh] ने कहा…

उम्दा रचना. स्वागत है आपका.
- Sulabh Poetry यादों का इंद्रजाल