रविवार, 23 मार्च 2014 | By: kamlesh chander verma

इकरार.....!!!

क्यूँ न किसी से कोई ,इकरार किया जाये।
जिसको न हो उम्मीद ,उसी से प्यार किया जाये।

जो बे रौनक हुई हो जिंदगी ,अपनों की बेरुखी से,
बना के उनको अपना ,इजहारे प्यार किया जाये।

जिनको मिला ना कभी ,अपनों का ही प्यार,
उनको कन्धे के सहारे का ,उपहार दिया जाये।

इतना भी नही है मुश्किल ,जीना इस जहाँ में,
बस उनको जहनी तौर से ,तैयार किया जाये ।

बड़ी बेशकीमती तोहफा, है ज़िंदगी 'कमलेश',
क्यूँ बेवजह यूं ही जिसको ,बेकार किया जाये।।