गुरुवार, 7 जनवरी 2010 | By: kamlesh chander verma

आपका दीदार हो गया..!!

था किस्मत में लिखा ,
आपका
दीदार हो गया। ,
जो सपना था अधूरा .
वह
साकार हो गया ।।

गर प्रबुद्ध जनों का संग , मिला होता ,
मुझे शिकवा होता जिन्दगी से ,
जिन्दगी को मुझसे गिला होता
चलो खत्म जिदगी का इंतजार हो गया

अहसासों के अहसास का एहतराम तो हुआ ,
मन में उठे प्रश्नों का विराम तो हुआ
जिन्दगी का यह पड़ाव ,''कमलेश'' की ,
मंजिलों में शुमार हो गया ।।

3 comments:

निर्मला कपिला ने कहा…

गर प्रबुद्ध जनों का संग ,न मिला होता ,
मुझे शिकवा होता जिन्दगी से ,
जिन्दगी को मुझसे गिला होता ।
चलो खत्म जिदगी का इंतजार हो गया ॥
अच्छी रचना है बधाई

संगीता पुरी ने कहा…

वाह .. बहुत बढिया लिखा है आपने !!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत खूब, कमलेश भाई..शानदार!!