रविवार, 10 जनवरी 2010 | By: kamlesh chander verma

तन्हा जिन्दगी के सफर में ...!!!

तन्हा जिन्दगी के सफर में ,तेरा साथ चाहिए ,
गिर जावूँ कहीं ठोकर खा के ,तेरा हाथ चाहिए

जिन्दगी गुजर गयी तन्हाईयों के साथ ,
अब तुमसे खुशियों कि सौगात चाहिए

मंसूबे जो बने वो पूरे हुए ,
हो जाये कुछ ऐसा अकस्मात चाहिए

जिन्दगी की किश्ती को किश्तों में बाँट ,
इसके लिये भी वक्त इफरात चाहिए

'कमलेश 'कुल मिला लब्बो -लुबाब ये
वादा निभाने को भी औकात चाहिए

3 comments:

M VERMA ने कहा…

ज़िन्दगी की कश्ती को किश्तों में न बाँट
वाह क्या कहने ---
बहुत सुन्दर

निर्मला कपिला ने कहा…

कमलेश 'कुल मिला लब्बो -लुबाब ये ।
वादा निभाने को भी औकात चाहिए ॥
वाह वाह बहुत खूब बधाई

अभिषेक प्रसाद 'अवि' ने कहा…

jindagi ki tanhayi ko badi khubsurati se utara hai aapne...