गुरुवार, 14 जनवरी 2010 | By: kamlesh chander verma

बेवफाई का अहसास इन...!!

बेवफाई का अहसास इन ,
हवावों में क्यों है तारी

क्या किसी भरोसे को फिर,
तोड़ने की है बारी

पहले के जख्म अभी सूखे भी नही ,
फिर क्या दूसरे जख्मों की है तय्यारी

करते रहे इलाज जिस्म के दागों की ,
आखिर में पता चला ये,,तो दिल की है बीमारी

छुड़ा कर चाहे दामन,चले जाना तुम ,
पर तुमसे पहले जाने की मेरी है बारी

मेरी कशिश दिल में रहे बाकी तेरे ,
रहेगी आखिरी वक्त तलक कोशिश है हमारी

'कमलेश ' होना शर्मिंदा किसी के सामने ,
जो भी गुजरा उसकी मेरी है जिम्मेदारी

1 comments:

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

achha likhate he aap.pahli baar aayaa aapke blog par achha lagaa.